अयोध्या की दीवाली
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दिन बुधवार ,दिनांक 22 अक्टूबर 2014 ...मै ,मेरी पत्नी और 3 साल की पुत्री ट्वीटी..हमलोग गोंडा -आसनसोल एक्सप्रेस से गोंडा से हाजीपुर जा रहे थे. यह ट्रेन वाया अयोध्या ,शाहगंज ,बलिया ,छपरा होते हुए हाजीपुर जाती है तो उसी क्रम में दीवाली के एक रोज पहले यानि मगध क्षेत्र की भाषा में कहे तो छोटी दीवाली के रोज सायं को हमारी ट्रेन अयोध्या में थी.हमने बचपन से ही सुना था कि भगवान् श्री राम जब रावन का बध करके 14 वर्ष बाद अयोध्या लौटे तो उसी ख़ुशी में दीवाली मनाया जाता है.मुझे बहुत उत्सुकता रही कि पता नहीं दीवाली के समय अयोध्या क्षेत्र में क्या रौनक रहता होगा वो देखने लायक रहता होगा ...लेकिन जिस शहर ने हिन्दू और हिंदुस्तान को प्रकाश का पर्व ''दीवाली'' दिया उस शहर को दीवाली की पूर्व संध्या पर न सजा देखा और न संवारा..अयोध्या में हमारी ट्रेन का इंजन रिवर्स किया जा रहा था .इसीलिए हमारी ट्रेन लगभग पौन घंटा अयोध्या की पावन भूमि पर खड़ी रही.हमारी ट्रेन को खुलते खुलते अँधेरा हो चूका था ....और हमारी ट्रेन अयोध्या शहर से पूर्वांचल की ओर शनैः शनैः प्रस्थान करने लगी ...और हमलोग उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र जैसे अकबरपुर , जौनपुर ,शाहगंज आदि आदि इलाका से गुजरते हुए यात्रा कर रहे थे ..............लेकिन हमारे मन में अयोध्या और आस पास के इलाका की विशेष दीवाली देखने की जो लालसा थी वो कसक रह गया ..........क्यूंकि मै मगध क्षेत्र का मूल निवासी हूँ और वहां दीवाली की शुरुआत त्रोयोदशी से ही हो जाता है और छठ तक घर द्वार विशेष रूप से प्रकाशित रहता है ...तो मुझे भी कुछ उसी तरह नहीं उससे बहुत बेहतर दीवाली देखने की लालसा हमारे मन में रहा .......खैर जैसे ही हमलोग आजमगढ़ के आस पास पहुचे तो छोटी दीवाली का छोटा रूप देखने को मिला .....चाइनीज विद्युत् बल्बों से सजी घर --मोहल्ला दीखने लगा और यह क्रम मुझे हाजीपुर तक दिखलाई दिया ................खैर जो भी अयोध्या की पावन धरती को मेरा कोटि कोटि बार प्रणाम ..........जय हो