गुरुवार, 18 दिसंबर 2014

अयोध्या की दीवाली

अयोध्या की दीवाली
==================
दिन बुधवार ,दिनांक 22 अक्टूबर 2014  ...मै ,मेरी पत्नी और 3 साल की पुत्री ट्वीटी..हमलोग गोंडा -आसनसोल एक्सप्रेस से गोंडा से हाजीपुर  जा रहे थे. यह ट्रेन वाया अयोध्या ,शाहगंज ,बलिया ,छपरा होते हुए हाजीपुर जाती है तो उसी क्रम में दीवाली के एक रोज पहले यानि मगध क्षेत्र की भाषा में कहे तो छोटी दीवाली के रोज सायं को हमारी ट्रेन अयोध्या में थी.हमने बचपन से ही सुना था कि भगवान् श्री राम जब रावन का बध करके 14 वर्ष बाद अयोध्या लौटे तो उसी ख़ुशी में दीवाली मनाया जाता है.मुझे बहुत उत्सुकता रही कि पता नहीं दीवाली के समय अयोध्या क्षेत्र में क्या रौनक रहता होगा वो देखने लायक रहता होगा ...लेकिन जिस शहर ने हिन्दू और हिंदुस्तान को प्रकाश का पर्व ''दीवाली'' दिया उस शहर को दीवाली की पूर्व संध्या पर न सजा देखा और न संवारा..अयोध्या में हमारी ट्रेन का इंजन रिवर्स किया जा रहा था .इसीलिए हमारी ट्रेन लगभग पौन घंटा अयोध्या की पावन भूमि पर खड़ी रही.हमारी ट्रेन को खुलते खुलते अँधेरा हो चूका था ....और हमारी ट्रेन अयोध्या शहर से पूर्वांचल की ओर शनैः शनैः प्रस्थान करने लगी ...और हमलोग उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र जैसे अकबरपुर , जौनपुर ,शाहगंज आदि आदि इलाका से गुजरते हुए यात्रा कर रहे थे ..............लेकिन हमारे मन में अयोध्या और आस पास के इलाका की विशेष दीवाली देखने की जो लालसा थी वो कसक रह गया ..........क्यूंकि मै मगध क्षेत्र का मूल निवासी हूँ और वहां दीवाली की शुरुआत त्रोयोदशी से ही हो जाता है और छठ तक घर द्वार विशेष रूप से प्रकाशित रहता है ...तो मुझे भी कुछ उसी तरह नहीं उससे बहुत बेहतर दीवाली देखने की लालसा हमारे मन में रहा .......खैर जैसे ही हमलोग आजमगढ़ के आस पास पहुचे तो छोटी दीवाली का छोटा रूप देखने को मिला .....चाइनीज विद्युत् बल्बों से सजी घर --मोहल्ला दीखने लगा और यह क्रम मुझे हाजीपुर तक दिखलाई दिया ................खैर जो भी अयोध्या की पावन धरती को मेरा कोटि कोटि बार प्रणाम ..........जय हो

बुधवार, 15 अक्टूबर 2014

घोड़ाडोंगरी स्टेशन को मेरा सलाम

उस दिन मै और मेरे मित्र श्री विजय सिन्हा जी रेलवे का पेपर देने के लिए नागपुर जा रहे थे.हमदोनो ने या कहे हमलोगों ने नागपुर जाने के लिए इटारसी स्टेशन पर ''दक्षिण एक्सप्रेस'' को पकड़ा...पता नहीं किस विशेषाधिकार के तहत बहुत सारे  परीक्षार्थियों का हुजूम दक्षिण एक्सप्रेस के शयनयान श्रेणी (स्लीपर क्लास ) में प्रवेश कर गया....ट्रेन इटारसी से खुली.सम्बंधित कोच का टिकट चेकिंग स्टाफ आया और सबको चेक करने लगा.कुछ लोग ''पास ''लिए हुए थे बाकी बिना किसी अधिकार पत्र या टिकट के सिर्फ इस अथॉरिटी के साथ ट्रेन में घुसे थे कि रेलवे के नौकरी के लिए परीक्षार्थी है ...मै तो कहूँगा वो चेकिंग स्टाफ बहुत भला मानस था जिसने सलाह दिया कि अगले दो स्टेशन के बाद यह ट्रेन रुकेगी और आपलोग उस स्टेशन पर उतर जाना और पीछे से आ रही फ़ास्ट पैसेंजर पर चढ़कर  नागपुर चला जाना.आगे स्टेशन पर गाड़ी रुकी.बहुत सारे परीक्षार्थी उत्तर गए.लेकिन जैसे ही  ट्रेन फिर से मूव की ..ज्यादातर अनुभवी लोग फिर ट्रेन में सवार हो गए.हम जैसे कुछ अनुभवहीन लोग दुबारा नहीं चढ़ पाए या यूँ कहे की चढ़ने की कोशिश ही नहीं की...जिस स्टेशन पर हमलोग उतरे या यूँ कहे कि उतारे गए उस स्टेशन का नाम था ''घोड़ाडोंगरी''.
बिलकुल ही अपरिचित जगह ,छोटा सा स्टेशन ,छोटा सा टिकेट काउंटर .......बहरहाल हमलोगों ने लाइन में खड़ा होकर टिकेट लेने का फैसला किया.हमलोग लाइन में काफी पीछे थे और फ़ास्ट पैसेंजर के आने का संकेत हो गया...पहले से लाइन में लगे हुए ज्यादातर लोग लोकल नारंगी व्यापारी थे ....जब उनलोगों को मालूम हुआ कि हमलोग परीक्षार्थी है और ''बाहर'' के है तो वे पीछे हो गए और टिकेट बाबु से हमलोगों को पहले टिकट देने का अनुरोध किया ....हमलोगों ने समय रहते नागपुर का टिकेट लिया और ट्रेन भी पकड़ी ........मुझे अपने अभीतक के लगभग दो लाख किलोमीटर तक रेल यात्रा करने में घोड़ाडोंगरी के लोगों के द्वारा उस दिन दिखाई गयी सहृदयता को सर्वाधिक प्रभावित किया है ....मै घोड़ाडोंगरी के लोगों की सहृदयता को ह्रदय से नमन करता हूँ
(यह घटना वर्ष २००३ की है )

गुरुवार, 9 अक्टूबर 2014

लोग करते है ...........

लोग करते है .............
अपने लक्ष्य के पूर्ति के लिए समय के आभाव को पूरा नींद में कटौती कर के करते है
----------------------------------
और
-----------------------------
अपने लक्ष्य के पूर्ति के लिए धन के आभाव को पूरा खाने के गुणवता में कटौती कर के करते है ..
कटु सत्य ==हम अपने लक्ष्य की पूर्ति के लिए अंतिम रूप से अपने स्वस्थ्य की कटौती करते है ..................जय हो

लोग कहते है ....

लोग कहते है .......
''फर्स्ट इम्प्रैशन इज लास्ट इम्प्रैशन''
और लोग ये भी कहते है ......
''अंत भला तो सब भला''
-------------------------
------------------------
दुनिया में लोग कितने कन्फ्यूज्ड है और दुनिया को भी कंफ्यूज करने में लगे रहते है .....जय हो

शनिवार, 4 अक्टूबर 2014

गाँधी जी के नाम पर

गाँधी जी के नाम पर
------------------------
वर्ष 2014 में बापू जी के जयंती पर भारत सरकार के तमाम कार्यालयों में विशेष कार्यक्रम हुए. इन विशेष कार्यक्रमों में झाड़ू जैसा अदना चीज भी खास बन गया.या यूँ कहें कि ''झाड़ू लगाना'' परमपरागत पढाई के तीन विधाओं --कला ,विज्ञान और वाणिज्य में से किसी एक का ना रहकर तीनों का हिस्सा हो गया ...झाड़ू जब कैमरा के सामने लगाया जाय तो यह ''कला'' है ...झाड़ू जब साफ़ सफाई के लिए लगाया जाय तो यह ''विज्ञान'' है.....झाड़ू जब पापी पेट के लिए लगाया जाय तो यह ''वाणिज्य'' है.
प्रधानमंत्री जी के स्वच्छता अभियान में जो देश ने देखा वो कला भी था ,विज्ञान भी था और वाणिज्य भी था ..समाज सेवा तो सिर्फ हेडलाइंस में था .इस पुरे कार्यक्रम के लिए सरकारी फंडिंग की गयी थी ना सिर्फ साफ़ सफाई से संवंधित सामानों के खरीदारी के लिए बल्कि इस सोसेबाजी के फोटोग्राफी के लिए ताकि ये मालूम किया जा सके कि ''सफाया '' करने के फ़िराक में रहने वाले किन किन बाबुओ ने ''सफाई'' के लिए कसमें खाई और झाड़ू लगाया....कितना अच्छा होता यदि प्रधानमंत्री जी विशेष अभियान के दिन उन सफाई कर्मचारियों को छुट्टी दे देते जो डेली झाड़ू लगाते  है ....और तब देखा जाता कि इस अभियान में कितना सोसाबाजी हुआ है और कितना सफाई .
....बहुत वर्षों के बाद यह एहसास तो हुआ ही कि 2 अक्टूबर को महान बापू की जयंती है ...नहीं तो राष्ट्रीय अवकाश के नाम पर सरकारी बाबु इस डेट में ऐश करते थे ....इमरजेंसी ड्यूटी वाले बाबु ड्यूटी करके कैश करते थे ....
----जिस देश का विज्ञान इतना आगे बढ़ गया हो कि मंगल ग्रह पर भी फतह कर ले उस देश के प्रधानमंत्री जी को देश के नागरिकों को सफाई जैसे मूलभूत चीज से अवगत कराने के लिए अभियान चलाना पड़ता है यह बहुत ही अफ़सोस की बात है  ...जय हो

मंगलवार, 30 सितंबर 2014

नौकर तो नौकर ही होता है ...

नौकर तो नौकर ही होता है
-----------------------------
वर्ष २०१४ ...बहुत सारे उन सरकारी बाबुओं को आजीवन याद रहेगा जो अपने घरेलु नौकरों को किसी न किसी कारन से प्रताड़ित करते है .देश के प्रधान सेवक प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने सबको अपने सफाई अभियान से जोड़कर धरती पर ला दिया है और एहसास करा दिया है कि नौकर तो नौकर ही होता है .कोई बहाना नहीं चलेगा ...न रिसोर्स की कमी का और ना ही मानव शक्ति का. आम तौर पर सरकार के सेवकों में सबसे निचले पायदान पर सफाई कर्मी ही होता है ...और प्रधान मंत्री जी ने इस अभियान में खुद को शामिल कर सरकार के सारे बड़े बड़े बाबुओं को उसकी औकात बता दिया है ......महात्मा गाँधी जी के जयंती पर जो रश्म अदायगी होता था वो इस बार एक महा अभियान की तरह सरकारी कार्यालयों में दिख रहा है .....और सरकार का यह अभियान शत प्रतिशत सफल होता भी दिख रहा है . इसमें कोई शक नहीं कि सफाई के लिए लोगों की मनोवृति  बदलने की आवश्यकता है ................जय हो  

शुक्रवार, 12 सितंबर 2014

भागलपुरी चादर

भागलपुरी चादर
-----------------
बिहार के सिल्क नगरी में बनने वाला यह चादर अपने आप में एक अलग पहचान बनाये हुए है . इसके ब्रांड वैल्यू का अंदाजा कोई इसी से लगा सकता है कि बाजार में खास करके उत्तर भारत के बिभिन्न शहरों कस्बों में भागलपुरी चादर के नाम पर डुप्लीकेट चादर बेचे जा रहे है .ओरिजिनल भागलपुरी चादर को आप वातानुकूलित कपड़ा कह सकते है.यह प्राकृतिक रूप से गर्मियों में भी ठंडक का एहसास करता है.पहले सिर्फ क्रीम कलर में उपलब्ध यह चादर ज़माने और बाजार के अनुसार बहुरंगो में उपलब्ध है

बछरे का इलाज रेलवे डॉक्टर से

बछरे का इलाज रेलवे डॉक्टर से
-------------------------------------
उस दिन श्री अनिल कुमार गोंडा स्टेशन में उप स्टेशन अधीक्षक के पद पर कार्य कर रहे थे . रात के लगभग साढ़े नौ बजे स्टेशन अधीक्षक श्री ए एन मिश्र जी का अनिल कुमार जी के मोबाइल पर फ़ोन आया कि स्टेशन के वेस्ट केबिन के पास एक बछरा किसी ट्रेन से चोट खा गयी है .आप अबिलम्ब रेलवे हॉस्पिटल को खबर कर दे कि वेस्ट केबिन एम्बुलेंस लेकर हॉस्पिटल स्टाफ पहुचे . समय १० बजे रात्रि को रेलवे अस्पताल का ड्रेसर और अन्य स्टाफ आया और उस बछरे का मलहम पट्टी कराया गया.गोंडा स्टेशन और आस पास के इलाके में रात भर यहाँ गॉसिप का विषय बना रहा .क्यूंकि आज तक न किसी ने सुना था और न देखा था कि आदमी के सरकारी डॉक्टर लावारिश जानवर का इलाज करे. खैर इलाज कराया गया...........इश्वर करे सबों में सबों के लिए ऐसी ही सम्बेदना हो. ............जय हो