रविवार, 21 फ़रवरी 2016

मैं कौन हूँ ?

मैं कौन हूँ ?
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किसी का पुत्र तो किसी का पौत्र हूँ
किसी का पति तो किसी का पिता हूँ
किसी का भाई तो किसी का जमाई हूँ ,
किसी का बहनोई तो किसी का नंदोई हूँ .

किसी के लिए राजा तो किसी के लिए रंक हूँ  
किसी का गुरु तो किसी का चेला हूँ
व्यक्ति एक पर मेरा व्यक्तित्व अनेक है
मै अनोखा हूँ ,अजूबा हूँ ,अलबेला हूँ

मेरा नाम मेरे जाति को बतलाता है
मेरी आस्था मेरे धर्म को बतलाता है
मेरी नागरिकता मेरे देश को बतलाता है
मेरा परिधान मेरी सम्पनता को बतलाता है .
मेरी बोली मेरे विद्वता को बतलाता है .

बहुत सोचने पर कुछ कुछ समझ पाता हूँ
सोचने के अंत में मैं अपने को 'प्याज' पाता हूँ
प्याज को परत दर परत छिलने पर अंत शून्य होता है
व्यक्ति से व्यकतित्व को निकालने पर  व्यक्ति भी शून्य होता है
तो मैं एक 'प्याज ' हूँ जिसपर व्यक्तित्व का ब्याज है .









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