रविवार, 7 फ़रवरी 2016

खंड खंड में विखंडित अपनी पहचान ,कहाँ है अपना भारत महान

आज भारतीय समाज का हर व्यक्ति अलग अलग खण्डों में विभक्त है ....और यह विभाजन बच्चे के जन्म से मृत्युपर्यंत जारी रहता है ..लिंग के आधार पर ,धर्म के आधार पर ,जाति के आधार पर ,भाषा के आधार पर ,रोजगार के आधार पर ,प्रदेश के आधार पर ,बोली के आधार पर ,नौकरी के आधार पर ,नौकरी में भी नौकरी के श्रेणी के आधार पर ,गरीबी अमीरी के आधार पर ,वर्ग के आधार पर ,उत्तर -दक्षिण के आधार पर ,पूरब -पश्चिम के आधार पर ,लोकल और बाहरी के आधार पर ,सरकारी और प्राइवेट के आधार पर ,APL और BPL के आधार पर ,नौकरी और व्यवसाय के आधार पर ,शाकाहारी और मांसाहारी के आधार पर ,नशा और नशा नहीं करने के आधार पर ,विवाहित और अविवाहित के आधार पर ,साइकिल और मोटरसाइकिल के आधार पर ,कार और बिना कार के आधार पर ,कॉलोनी के आधार पर ,गली के आधार पर ,मोहल्ला के आधार पर ,नदी और सड़क के इसपार -उसपार के आधार  पर ,लम्बाई के आधार पर ,गोरा और सांवला  के आधार पर ,गंजा और बाल वाले के आधार पर ,सफ़ेद और काले बाल के आधार पर ,अभिनेता और अभिनेत्री के पसंद के आधार पर ,नेता और पार्टी के पसंद के आधार पर ,विचारधारा के आधार पर ,गांधीजी को पसंद और ना पसंद करने के आधार पर ,मोदी जी को पसंद और ना पसंद करने के आधार पर ,ट्रेन से यात्रा करने पर कन्फर्म सीट और वेटिंग लिस्ट के आधार पर ,ट्रेन में एसी और नॉन एसी के आधार पर ,ट्रेन में आरक्षित और अनारक्षित के आधार पर ,.....गाँव वाला और शहर वाले के आधार पर ....और ना जाने कितने आधार पर हम रोज बंटते रहते है और अपने आप सुरक्षित होने के ढोंग करते है 
...इस प्रकार,हमारी पहचान हर क्षण विखंडित होती है ...जय हो ...

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