शनिवार, 27 फ़रवरी 2016

चाभी की आत्मकथा

मै कुंजी हूँ ,मै चाभी हूँ
मैं हर दरवाजे की  नाभी हूँ

मैं सार्वदेशिक हूँ ,सार्वकालिक हूँ
मैं मालिकों का मालिक हूँ

मेरे होने मात्र से रिश्ते जुड़ते है
मेरे गुम होने से दरवाजे टूटते हैं

मेरे अनेकों प्रकार है ,
अनेकों आकार है

मैं हिन्दू हूँ ,मैं मुसलमान हूँ
मैं कला ,वाणिज्य और विज्ञान हूँ

मैं पूंजीवादियों की  पूंजी हूँ
मैं समाजवादियों की  कुंजी हूँ

मैं किंग मेकर भी हूँ
मैं कैरियर मेकर भी हूँ 

गरीबों के दरवाजे का रखवाला हूँमैं
अमीरों के खजाने का रखवाला हूँ  मैं

मैं कलियुग का प्रतीक हूँ
मैं निडर हूँ ,निर्भीक हूँ

मेरे होने का मतलब सतयुग का अंत है
मेरे होने का मतलब हेराफेरी अनंत है

मैं स्वामित्व का प्रतीक हूँ
मैं प्रभुत्व का प्रतीक हूँ

 सड़कयानों में हूँ मै 
वायुयानों में हूँमैं

 जलयानों में हूँ  मैं
 रेलयानों में हूँ मैं

सिनेमा के गानों में हूँ मैं
लोगों के तानों में हूँ मै

घर घर की कहानी हूँ मैं
हर घर की जेठानी हूँ मैं

 कंप्यूटर के लॉग इन में हूँ  मैं
ए टी एम के पिन में हूँ मैं


कुंजी हूँ मैं चाभी हूँ
हर दरवाजे कि नाभी हूँ

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