रविवार, 21 फ़रवरी 2016

मैं कौन हूँ ?

मैं कौन हूँ ?
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किसी का पुत्र तो किसी का पौत्र हूँ
किसी का पति तो किसी का पिता हूँ
किसी का भाई तो किसी का जमाई हूँ ,
किसी का बहनोई तो किसी का नंदोई हूँ .

किसी के लिए राजा तो किसी के लिए रंक हूँ  
किसी का गुरु तो किसी का चेला हूँ
व्यक्ति एक पर मेरा व्यक्तित्व अनेक है
मै अनोखा हूँ ,अजूबा हूँ ,अलबेला हूँ

मेरा नाम मेरे जाति को बतलाता है
मेरी आस्था मेरे धर्म को बतलाता है
मेरी नागरिकता मेरे देश को बतलाता है
मेरा परिधान मेरी सम्पनता को बतलाता है .
मेरी बोली मेरे विद्वता को बतलाता है .

बहुत सोचने पर कुछ कुछ समझ पाता हूँ
सोचने के अंत में मैं अपने को 'प्याज' पाता हूँ
प्याज को परत दर परत छिलने पर अंत शून्य होता है
व्यक्ति से व्यकतित्व को निकालने पर  व्यक्ति भी शून्य होता है
तो मैं एक 'प्याज ' हूँ जिसपर व्यक्तित्व का ब्याज है .









रविवार, 7 फ़रवरी 2016

खंड खंड में विखंडित अपनी पहचान ,कहाँ है अपना भारत महान

आज भारतीय समाज का हर व्यक्ति अलग अलग खण्डों में विभक्त है ....और यह विभाजन बच्चे के जन्म से मृत्युपर्यंत जारी रहता है ..लिंग के आधार पर ,धर्म के आधार पर ,जाति के आधार पर ,भाषा के आधार पर ,रोजगार के आधार पर ,प्रदेश के आधार पर ,बोली के आधार पर ,नौकरी के आधार पर ,नौकरी में भी नौकरी के श्रेणी के आधार पर ,गरीबी अमीरी के आधार पर ,वर्ग के आधार पर ,उत्तर -दक्षिण के आधार पर ,पूरब -पश्चिम के आधार पर ,लोकल और बाहरी के आधार पर ,सरकारी और प्राइवेट के आधार पर ,APL और BPL के आधार पर ,नौकरी और व्यवसाय के आधार पर ,शाकाहारी और मांसाहारी के आधार पर ,नशा और नशा नहीं करने के आधार पर ,विवाहित और अविवाहित के आधार पर ,साइकिल और मोटरसाइकिल के आधार पर ,कार और बिना कार के आधार पर ,कॉलोनी के आधार पर ,गली के आधार पर ,मोहल्ला के आधार पर ,नदी और सड़क के इसपार -उसपार के आधार  पर ,लम्बाई के आधार पर ,गोरा और सांवला  के आधार पर ,गंजा और बाल वाले के आधार पर ,सफ़ेद और काले बाल के आधार पर ,अभिनेता और अभिनेत्री के पसंद के आधार पर ,नेता और पार्टी के पसंद के आधार पर ,विचारधारा के आधार पर ,गांधीजी को पसंद और ना पसंद करने के आधार पर ,मोदी जी को पसंद और ना पसंद करने के आधार पर ,ट्रेन से यात्रा करने पर कन्फर्म सीट और वेटिंग लिस्ट के आधार पर ,ट्रेन में एसी और नॉन एसी के आधार पर ,ट्रेन में आरक्षित और अनारक्षित के आधार पर ,.....गाँव वाला और शहर वाले के आधार पर ....और ना जाने कितने आधार पर हम रोज बंटते रहते है और अपने आप सुरक्षित होने के ढोंग करते है 
...इस प्रकार,हमारी पहचान हर क्षण विखंडित होती है ...जय हो ...

बुधवार, 2 दिसंबर 2015

सिंगापुर में भारतीय सिख समुदाय

सिख सबसे पहले 1881 में सिंगापूर में पहुचे थे .जल्दी ही सिख समुदाय सिंगापुर  पुलिस बल की रीढ़ बन गए .सिंगापुर  के प्रधानमंत्री श्री ली सीन लूँग ने देश के सिख समुदाय की सराहना करते हुए कहा है कि सरकार कई तरीके से उनकी मदद करती रहेगी .सिंगापुर सरकार पब्लिक स्कूल में पंजाबी को दूसरी भाषा के तौर पर मान्यता दे चुकी है .सिंगापुर सरकार ने भारतीय छात्रों को दूसरी भाषा के तौर पर उनकी मातृभाषा अर्थात उर्दू ,बंगला ,गुजराती ,हिंदी और पंजाबी अपनाने की इजाजत दी है .

मंगलवार, 1 दिसंबर 2015

दाल

दाल
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दाल ,तू महान है
तू प्रोटीन की  खान है,
थाली की  शान है,
शाकाहारी की  जान है

दाल तू महान है
तेरे अनेकों प्रकार है ,
तुमसे घबराती सरकार है ,
तुमसे चमकती व्यापार है ,

दाल तू महान है
कभी तुम थाली से  गायब
कभी तुम गाली से गायब
आजकल तू फेसबुक से गायब

दाल तू महान है
कभी  घर के मुर्गी तेरे  बराबर
कभी तू मुर्गी के बराबर

दाल तू महान है
तू गरीबों के प्रोटीन का स्रोत  हो
तू नेताओं के विटामिन का स्रोत हो 
तू सरकारों के अपयश का स्रोत हो

दाल तू महान हो
तू चाहे आयातित हो
चाहे निर्यातित हो
हमेशा ही तू मर्यादित हो

दाल तू महान हो !
  (C)RAJESH KUMAR

एरिया मेनेजर साहब का रिटायरमेंट

दिनांक 30 नवम्बर 2015 को गोंडा रेलवे के एरिया मेनेजर साहब श्री नरेन्द्र नाथ जी रिटायर हो गए .उनके रिटायरमेंट के पार्टी का आयोजन सेफ्टी कैंप गोंडा में दिनांक 01 दिसम्बर 2015 को परिचालन कर्मचारियों द्वारा किया गया .विदाई समारोह लगभग चार बजे सायं सेफ्टी कैंप गोंडा में प्रारंभ हुआ जिसमे गोंडा के स्टेशन अधीक्षक श्री ए एन मिश्र ,सेफ्टी कैंप के मुख्य अनुदेशक श्री आर एम भरद्वाज ,गोंडा के ए इ एन ,ए एम इ ,ए एस टी एवं अन्य अधिकारी गन एवं कर्मचारियों ने भाग लिया .मंच का सञ्चालन गोंडा के उप स्टेशन अधीक्षक श्री प्रभाकर पाण्डेय ने किया .फोटोग्राफी श्री स्वतंत्र पाण्डेय एवं श्री सुधीर कुमार सिंह द्वारा किया गया .समारोह के अंत में जलपान की व्यवस्था थी.अंत में अंग्रेजी बैंड बाजे के साथ श्री नरेन्द्र नाथ जी को विदाई दी गयी .लोगों ने उनके स्वस्थ्य जीवन की कामना की ...श्री नरेन्द्र नाथ जी की महत्वाकांक्षा राजनीती में जाने की है .भगवान उनके महत्व कांक्षा को पूरा करने में शक्ति प्रदान करे ....जय हो

गुरुवार, 18 दिसंबर 2014

अयोध्या की दीवाली

अयोध्या की दीवाली
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दिन बुधवार ,दिनांक 22 अक्टूबर 2014  ...मै ,मेरी पत्नी और 3 साल की पुत्री ट्वीटी..हमलोग गोंडा -आसनसोल एक्सप्रेस से गोंडा से हाजीपुर  जा रहे थे. यह ट्रेन वाया अयोध्या ,शाहगंज ,बलिया ,छपरा होते हुए हाजीपुर जाती है तो उसी क्रम में दीवाली के एक रोज पहले यानि मगध क्षेत्र की भाषा में कहे तो छोटी दीवाली के रोज सायं को हमारी ट्रेन अयोध्या में थी.हमने बचपन से ही सुना था कि भगवान् श्री राम जब रावन का बध करके 14 वर्ष बाद अयोध्या लौटे तो उसी ख़ुशी में दीवाली मनाया जाता है.मुझे बहुत उत्सुकता रही कि पता नहीं दीवाली के समय अयोध्या क्षेत्र में क्या रौनक रहता होगा वो देखने लायक रहता होगा ...लेकिन जिस शहर ने हिन्दू और हिंदुस्तान को प्रकाश का पर्व ''दीवाली'' दिया उस शहर को दीवाली की पूर्व संध्या पर न सजा देखा और न संवारा..अयोध्या में हमारी ट्रेन का इंजन रिवर्स किया जा रहा था .इसीलिए हमारी ट्रेन लगभग पौन घंटा अयोध्या की पावन भूमि पर खड़ी रही.हमारी ट्रेन को खुलते खुलते अँधेरा हो चूका था ....और हमारी ट्रेन अयोध्या शहर से पूर्वांचल की ओर शनैः शनैः प्रस्थान करने लगी ...और हमलोग उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र जैसे अकबरपुर , जौनपुर ,शाहगंज आदि आदि इलाका से गुजरते हुए यात्रा कर रहे थे ..............लेकिन हमारे मन में अयोध्या और आस पास के इलाका की विशेष दीवाली देखने की जो लालसा थी वो कसक रह गया ..........क्यूंकि मै मगध क्षेत्र का मूल निवासी हूँ और वहां दीवाली की शुरुआत त्रोयोदशी से ही हो जाता है और छठ तक घर द्वार विशेष रूप से प्रकाशित रहता है ...तो मुझे भी कुछ उसी तरह नहीं उससे बहुत बेहतर दीवाली देखने की लालसा हमारे मन में रहा .......खैर जैसे ही हमलोग आजमगढ़ के आस पास पहुचे तो छोटी दीवाली का छोटा रूप देखने को मिला .....चाइनीज विद्युत् बल्बों से सजी घर --मोहल्ला दीखने लगा और यह क्रम मुझे हाजीपुर तक दिखलाई दिया ................खैर जो भी अयोध्या की पावन धरती को मेरा कोटि कोटि बार प्रणाम ..........जय हो

बुधवार, 15 अक्टूबर 2014

घोड़ाडोंगरी स्टेशन को मेरा सलाम

उस दिन मै और मेरे मित्र श्री विजय सिन्हा जी रेलवे का पेपर देने के लिए नागपुर जा रहे थे.हमदोनो ने या कहे हमलोगों ने नागपुर जाने के लिए इटारसी स्टेशन पर ''दक्षिण एक्सप्रेस'' को पकड़ा...पता नहीं किस विशेषाधिकार के तहत बहुत सारे  परीक्षार्थियों का हुजूम दक्षिण एक्सप्रेस के शयनयान श्रेणी (स्लीपर क्लास ) में प्रवेश कर गया....ट्रेन इटारसी से खुली.सम्बंधित कोच का टिकट चेकिंग स्टाफ आया और सबको चेक करने लगा.कुछ लोग ''पास ''लिए हुए थे बाकी बिना किसी अधिकार पत्र या टिकट के सिर्फ इस अथॉरिटी के साथ ट्रेन में घुसे थे कि रेलवे के नौकरी के लिए परीक्षार्थी है ...मै तो कहूँगा वो चेकिंग स्टाफ बहुत भला मानस था जिसने सलाह दिया कि अगले दो स्टेशन के बाद यह ट्रेन रुकेगी और आपलोग उस स्टेशन पर उतर जाना और पीछे से आ रही फ़ास्ट पैसेंजर पर चढ़कर  नागपुर चला जाना.आगे स्टेशन पर गाड़ी रुकी.बहुत सारे परीक्षार्थी उत्तर गए.लेकिन जैसे ही  ट्रेन फिर से मूव की ..ज्यादातर अनुभवी लोग फिर ट्रेन में सवार हो गए.हम जैसे कुछ अनुभवहीन लोग दुबारा नहीं चढ़ पाए या यूँ कहे की चढ़ने की कोशिश ही नहीं की...जिस स्टेशन पर हमलोग उतरे या यूँ कहे कि उतारे गए उस स्टेशन का नाम था ''घोड़ाडोंगरी''.
बिलकुल ही अपरिचित जगह ,छोटा सा स्टेशन ,छोटा सा टिकेट काउंटर .......बहरहाल हमलोगों ने लाइन में खड़ा होकर टिकेट लेने का फैसला किया.हमलोग लाइन में काफी पीछे थे और फ़ास्ट पैसेंजर के आने का संकेत हो गया...पहले से लाइन में लगे हुए ज्यादातर लोग लोकल नारंगी व्यापारी थे ....जब उनलोगों को मालूम हुआ कि हमलोग परीक्षार्थी है और ''बाहर'' के है तो वे पीछे हो गए और टिकेट बाबु से हमलोगों को पहले टिकट देने का अनुरोध किया ....हमलोगों ने समय रहते नागपुर का टिकेट लिया और ट्रेन भी पकड़ी ........मुझे अपने अभीतक के लगभग दो लाख किलोमीटर तक रेल यात्रा करने में घोड़ाडोंगरी के लोगों के द्वारा उस दिन दिखाई गयी सहृदयता को सर्वाधिक प्रभावित किया है ....मै घोड़ाडोंगरी के लोगों की सहृदयता को ह्रदय से नमन करता हूँ
(यह घटना वर्ष २००३ की है )