शुक्रवार, 30 सितंबर 2016

देश का सन्देश बदल रहा है ..

देश का सन्देश बदल रहा है
क्यूंकि मेरा देश बदल रहा है

पहले हम आतंकवाद की निंदा करते थे
आतंकियों को जिन्दा पकड़ते थे

क्युकी मेरा देश बदल रहा है
तो आतंकियों के मौत का होम डिलीवरी हो रहा है

देश का सन्देश बदल रहा है
क्यूंकि मेरा देश बदल रहा है

विश्व का पहला सर्जिकल अटैक 
भगवन श्री राम ने किया था
जब राम भक्त हनुमान ने
श्री लंका को तहस नहस किया था

भारत  अपना  इतिहास दुहरा रहा है
पाकिस्तान को उसकी औकात बता रहा है
सर्जिकल अटैक तो अभी झांकी है
पेशावर पर तिरंगा फहराना  बाकी है

देश का सन्देश बदल रहा है
क्यूंकि मेरा देश बदल रहा है

पहले हम आतंकवाद की कड़ी निंदा करते थे
कड़ी से कड़ी और घोर निंदा करते   थे
पहले हम ईट का जवाब पत्थर से जुबानों से देते थे
आज हमारे जवान गोली का जवाब गोला से देते है

देश का सन्देश बदल रहा है
क्यूंकि देश बदल रहा है

रविवार, 31 जुलाई 2016

डॉ जय नारायण श्रीवास्तव

डॉ जय नारायण श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश के गोंडा शहर के नामी डॉक्टर है ..ये एक ऐसे शख्स है जिनके जीवित रहते ही गोंडा के एक महत्वपूर्ण चौराहा का नाम जय नारायण चौराहा है .हर जगह से इलाज करा करा कर थक गए लोग डॉक्टर साहब के पास आते है .इनका परामर्श फीस है ..एक हजार रुपैया ..और अगले दस दिन के अन्दर फिर परामर्श लेने पर फिर पांच सौ देना होता है ..दस दिन के बाद दिखाने पर एक हजार रुपैया फीस है .गोंडा के इस वयोवृद्ध डॉक्टर की खासियत ये है कि इन्हें जब लगता है कि मरीज भूलवश उनके पास आ गया है या मरीज का इलाज सिर्फ खान पान से किया जा सकता है तो मरीज को पूरा का पूरा पैसा वापस कर देते है ...

शुक्रवार, 25 मार्च 2016

''पुआ '' की आत्मकथा

पुआ की आत्मकथा
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मैं पुआ हूँ,मैं पुआ हूँ
मैं पुड़ी की  बुआ हूँ

मैं होली में हूँ ,दिवाली में हूँ
मैं हर घर की  खुशहाली में हूँ

 अनेकों प्रकार हूँ  ,आकार हूँ
हर हाल में मैं शाकाहार हूँ

देशी पकवान का सर्वोत्तम उपहार हूँ मैं
भक्तों का सर्वोत्तम आहार हूँ मैं

संस्कृत में अपूप हूँ मैं
हिंदी में पुआ हूँ मैं
बंगला में मालपुआ हूँ मै
सभी पकवानों की  बुआ हूँ मै

पकवानों का देशी स्वाद हूँ मैं
वैदिक युग से आबाद हूँ मै

मैं कल भी था ,और आज भी हूँ
मै भोजन का सरताज हूँ

मेरे होने मात्र से भोजन सम्पूर्ण होता है
मेरे होने मात्र से सत्कार परिपूर्ण होता हैं

भोजन का देशी मिजाज हूँ मैं
छपन भोग का साज हूँ मैं

मैं पुआ हूँ मैं पुआ हूँ
मै पुड़ी की बुआ हूँ




रविवार, 6 मार्च 2016

पिंजड़ा



पिंजड़ा में कैद हर जीव पालतू है
पिंजड़ा में कैद हर जीव फालतू है

पिंजड़ा में कैद हर जीव 'वेल ट्रेंड 'हैं
पिंजड़ा में कैद हर जीव 'ब्रेन ड्रैनड' हैं

पिंजड़ा में कैद यू पी का भैया भी है
पिंजड़ा में कैद बिहार का कन्हैया भी है

पिंजड़ा प्रतीक है शासन का
पिंजड़ा प्रतीक है अनुशासन का

पिंजड़ा प्रतीक है स्वामित्व का
पिंजड़ा प्रतीक है प्रभुत्व का


कोई कर्म के पिंजड़े का कैदी है
कोई धर्म के पिंजड़े का कैदी है

पिंजड़ा का हर कैदी 'तोता ' है
पिंजड़ा का हर कैदी रोता है

कोई विचारधारा के पिंजड़ा में कैद है
कोई विकासधारा के पिंजड़ा में कैद है

पिंजड़ा तो पिंजड़ा ही होता है
चाहे वह विधि का हो या विधान का
चाहे वह समृधि का हो या संबिधान का







बुधवार, 2 मार्च 2016

अपनी डफली , अपना राग : चाभी की आत्मकथा

अपनी डफली , अपना राग : चाभी की आत्मकथा: मै कुंजी हूँ ,मै चाभी हूँ मैं हर दरवाजे की  नाभी हूँ मैं सार्वदेशिक हूँ ,सार्वकालिक हूँ मैं मालिकों का मालिक हूँ मेरे होने मात्र से र...

सोमवार, 29 फ़रवरी 2016

बजट

बजट
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मैं भारत का बजट हूँ
मैं बचत का बजट हूँ

मैं गरीबों का बजट हूँ
मैं अमीरों का बजट हूँ


मैं टैक्स का बजट हूँ
मैं रिलैक्स का बजट हूँ


मैं आंकड़ों का खेल हूँ
मैं लाभ हानि का मेल हूँ

मैं सरकारी हूँ
सबपर असरकारी हूँ

मै आय का बजट हूँ
मैं व्यय का बजट हूँ

मैं उन्नति का बजट हूँ
मैं प्रगति का बजट हूँ

मैं भाषण का बजट हूँ
मैं शासन का बजट हूँ

मैं सेस का बजट हूँ
मैं विशेष का बजट हूँ

ना मैं मोदी इफ़ेक्ट हूँ
ना मैं मोदी डिफेक्ट हूँ

मैं इंडिया इफ़ेक्ट हूँ
मैं भारत परफेक्ट हूँ

भला कहने वालों का बजट हूँ मैं
बुरा कहने वालों का बजट हूँ मैं

मैं भारत का बजट हूँ
मैं इंडिया का बजट हूँ




शनिवार, 27 फ़रवरी 2016

चाभी की आत्मकथा

मै कुंजी हूँ ,मै चाभी हूँ
मैं हर दरवाजे की  नाभी हूँ

मैं सार्वदेशिक हूँ ,सार्वकालिक हूँ
मैं मालिकों का मालिक हूँ

मेरे होने मात्र से रिश्ते जुड़ते है
मेरे गुम होने से दरवाजे टूटते हैं

मेरे अनेकों प्रकार है ,
अनेकों आकार है

मैं हिन्दू हूँ ,मैं मुसलमान हूँ
मैं कला ,वाणिज्य और विज्ञान हूँ

मैं पूंजीवादियों की  पूंजी हूँ
मैं समाजवादियों की  कुंजी हूँ

मैं किंग मेकर भी हूँ
मैं कैरियर मेकर भी हूँ 

गरीबों के दरवाजे का रखवाला हूँमैं
अमीरों के खजाने का रखवाला हूँ  मैं

मैं कलियुग का प्रतीक हूँ
मैं निडर हूँ ,निर्भीक हूँ

मेरे होने का मतलब सतयुग का अंत है
मेरे होने का मतलब हेराफेरी अनंत है

मैं स्वामित्व का प्रतीक हूँ
मैं प्रभुत्व का प्रतीक हूँ

 सड़कयानों में हूँ मै 
वायुयानों में हूँमैं

 जलयानों में हूँ  मैं
 रेलयानों में हूँ मैं

सिनेमा के गानों में हूँ मैं
लोगों के तानों में हूँ मै

घर घर की कहानी हूँ मैं
हर घर की जेठानी हूँ मैं

 कंप्यूटर के लॉग इन में हूँ  मैं
ए टी एम के पिन में हूँ मैं


कुंजी हूँ मैं चाभी हूँ
हर दरवाजे कि नाभी हूँ

रविवार, 21 फ़रवरी 2016

मैं कौन हूँ ?

मैं कौन हूँ ?
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किसी का पुत्र तो किसी का पौत्र हूँ
किसी का पति तो किसी का पिता हूँ
किसी का भाई तो किसी का जमाई हूँ ,
किसी का बहनोई तो किसी का नंदोई हूँ .

किसी के लिए राजा तो किसी के लिए रंक हूँ  
किसी का गुरु तो किसी का चेला हूँ
व्यक्ति एक पर मेरा व्यक्तित्व अनेक है
मै अनोखा हूँ ,अजूबा हूँ ,अलबेला हूँ

मेरा नाम मेरे जाति को बतलाता है
मेरी आस्था मेरे धर्म को बतलाता है
मेरी नागरिकता मेरे देश को बतलाता है
मेरा परिधान मेरी सम्पनता को बतलाता है .
मेरी बोली मेरे विद्वता को बतलाता है .

बहुत सोचने पर कुछ कुछ समझ पाता हूँ
सोचने के अंत में मैं अपने को 'प्याज' पाता हूँ
प्याज को परत दर परत छिलने पर अंत शून्य होता है
व्यक्ति से व्यकतित्व को निकालने पर  व्यक्ति भी शून्य होता है
तो मैं एक 'प्याज ' हूँ जिसपर व्यक्तित्व का ब्याज है .









रविवार, 7 फ़रवरी 2016

खंड खंड में विखंडित अपनी पहचान ,कहाँ है अपना भारत महान

आज भारतीय समाज का हर व्यक्ति अलग अलग खण्डों में विभक्त है ....और यह विभाजन बच्चे के जन्म से मृत्युपर्यंत जारी रहता है ..लिंग के आधार पर ,धर्म के आधार पर ,जाति के आधार पर ,भाषा के आधार पर ,रोजगार के आधार पर ,प्रदेश के आधार पर ,बोली के आधार पर ,नौकरी के आधार पर ,नौकरी में भी नौकरी के श्रेणी के आधार पर ,गरीबी अमीरी के आधार पर ,वर्ग के आधार पर ,उत्तर -दक्षिण के आधार पर ,पूरब -पश्चिम के आधार पर ,लोकल और बाहरी के आधार पर ,सरकारी और प्राइवेट के आधार पर ,APL और BPL के आधार पर ,नौकरी और व्यवसाय के आधार पर ,शाकाहारी और मांसाहारी के आधार पर ,नशा और नशा नहीं करने के आधार पर ,विवाहित और अविवाहित के आधार पर ,साइकिल और मोटरसाइकिल के आधार पर ,कार और बिना कार के आधार पर ,कॉलोनी के आधार पर ,गली के आधार पर ,मोहल्ला के आधार पर ,नदी और सड़क के इसपार -उसपार के आधार  पर ,लम्बाई के आधार पर ,गोरा और सांवला  के आधार पर ,गंजा और बाल वाले के आधार पर ,सफ़ेद और काले बाल के आधार पर ,अभिनेता और अभिनेत्री के पसंद के आधार पर ,नेता और पार्टी के पसंद के आधार पर ,विचारधारा के आधार पर ,गांधीजी को पसंद और ना पसंद करने के आधार पर ,मोदी जी को पसंद और ना पसंद करने के आधार पर ,ट्रेन से यात्रा करने पर कन्फर्म सीट और वेटिंग लिस्ट के आधार पर ,ट्रेन में एसी और नॉन एसी के आधार पर ,ट्रेन में आरक्षित और अनारक्षित के आधार पर ,.....गाँव वाला और शहर वाले के आधार पर ....और ना जाने कितने आधार पर हम रोज बंटते रहते है और अपने आप सुरक्षित होने के ढोंग करते है 
...इस प्रकार,हमारी पहचान हर क्षण विखंडित होती है ...जय हो ...